लडके की 8 ऐसी चीजे , जो आज लड़किया यूज कर रही है?

क्या आप को पता है कि पहले के जमाने में सेनेटरी पैड को लड़कों के लिए बनाया गया था और यह झटका दुगना हो जाएगा जवाब जानोगे की घाघरा भी लड़कों के लिए हीबनाए गए राजा महाराजा तक पहना करते थे आज हम आपको आठ लड़के की ऐसी चीजों के बारे में बताने वाले हैं जिसे फैशन समझकर आज लड़कियां इस्तेमाल करती है नंबर एक डिस्पोजेबल मेंस्ट्रूअल पेट्स सेनेटरी पैड जो प्रोडक्ट लड़कियों के लिए एक नेसेसिटी है वह पहले लड़कों के लिए बनाया गया था आज दुनिया में 1.8 बिलियन गर्ल्स को मंथली पीरियड्स होते जिसमें सबसे ज्यादा सेनेटरी पैड ही इस्तेमाल होते असल में जब वर्ल्ड वॉर फर्स्ट चल रहा था तब कहीं अमेरिकी सोल्जर फ्रांस में घायल पड़े थे और उन घायल सोल्जर को गांव से उभरने के लिए अमेरिका के पिताजी ने एक ऐसी पट्टी का आविष्कार किया जो काफी खून सोच सके इस इन्वेंशन के कहीं सोल्जर को बचाया इनफैक्ट लोग इसे मास्क भी बनाने लगे थे

इन सब के बीच इस कॉटन पर फ्रेंच नर्स का ध्यान गया और यह क्रांति हो गई उसे दौरान पीरियड्स के लिए सिर्फ साधारण कपड़ा घास या मिट्टी का इस्तेमाल होता था पर इस कॉटन ने इतिहास बदलकर सीनेटरी पद का इन्वेंशन कर डाला नंबर दो क्रॉप टॉपएस जिस चीज को आज लोग सिर्फ एप्स दिखाने के लिए उसे करें वह पहले एक वक्त की जरूरत हुआ करती थी जब वर्ल्ड वॉर सेकंड के टाइम फौजियों को कपड़ों की टंगी हुई तो एक भाई साहब ने एक कपड़े के दो हिस्से का डालें और बन गया क्रॉप टॉप इन फैक्ट यह इतना फायदेमंद रहा कि यह वार के बाद एक फैशन बन गया जिस पर सबसे पहले नजर पड़ी आज लोग सिर्फ एप्स दिखाने के लिए उसे करें वह पहले एक वक्त की जरूरत हुआ करती थी जब बार-बार सेकंड के टाइम फौजियों को कपड़ों की टंगी हुई तो एक भाई साहब ने एक कपड़े के दो हिस्से का डालें और बन गया क्रॉप टॉप इन फैक्ट यह इतना फायदेमंद रहा कि यह वार के बाद एक फैशन बन गया जिस पर सबसे पहली नजर पड़ी बॉडी बिल्डर की जिम में बगैर कुछ पहने वर्कआउट करना अलाउड नहीं था इसलिए बॉडी बिल्डर ने सोचा क्यों ना इस क्रॉप टॉप को आजमाएं जिसके बाद उन्हें एप्स शो करने का मौका मिल गया इतना ही रबड़ी के लिए भी क्रॉप टॉप पहनने की शुरुआत होने लगी मर्दों को देखा औरतों में यह फैशन थोड़ा ट्रेंडी होता गया जी देखकर लड़कियों को रिलैक्स हुआ उनके लिए ही बनाएं औरतों के ज्यादा उसे से यह प्रोडक्ट वूमेन सेंट्रिक हो गया और बेचारे लड़के इससे भी हाथ धो बैठे स्कर्टदोस्तों ऐसे फोटो देखकर हम सब इन्हें रोल करते हैं पर क्या आप जानते कि स्कॉटलैंड में लोग अपने स्कर्ट को पहनकर सोते भी थे इन फैक्ट बोलो तो जंग भी स्कर्ट पहन के लड़ते थे शायद उन्हें डर था कि कुछ ऐसा ना हो जाए असल में पहले के समय में मर्दों के स्कर्ट इसलिए बनाए जाते थे क्योंकि वह काफी चिप थे और थॉट यह कपड़े काफी जल्दी बन भी जाते थे फिर यह इतनी पॉपुलर हो गए कि कार्ड पहनने वाले बंदों को शरीफ और ट्राउजर पहनने वालों को सब बेवकूफ करने लगे इस ट्रेन में कहीं राजा जैसे हेनरी भी और अलराइट इसे पहनना शुरू किया था लेकिन घुड़सवारी जंग और रोज के काम में कठिनाइयां आने की बात मर्दों को रिलायंस सुबह की भैया घुटने के नीचे भी कपड़ा लगेगा इसीलिए तब से मर्दों ने पेंट्स अपनाना शुरू किया लेकिन उनके अपोजिट महिलाओं ने मर्दों की स्कर्ट भी अपनी बना ली आज भी दुनिया के कई हिस्सों में कलर के हिसाब से स्कर्ट के कुछ वर्जनस दिखाई देते जैसे इंडिया में धोती मलेशिया में सारण और स्कॉटलैंड में खेलनंबर चार मेकअप अगर यह देखकर आपको चप्पल निकालने का मन कर रहा है तो रुकिए क्योंकि जिस मेकअप को हम सिर्फ लेडिस प्रोडक्ट मानते वह एक जमाने में मर्दानगी का प्रतीक जी हां इजिप्ट में मर्द अपने गोद को बुलवाने के लिए ग्रीन आईशैडो और आई लाइनर लगती थी तब जितना ज्यादा मेकअप उतना उसे मर्द को अमीर माना जाता था और धीरे-धीरे इजिप्ट के साथ यह ट्रेन रूम में इस तरफ फैली कि वहां के लोग सूअर का खून देकर अपने सर और नाखूनों में रखने लगे हेयर मेकअप का यह द्वारा शायद आज इसी तरह चलता रहता मगर क्वीन विक्टोरिया के जाने के 100 साल बाद मूवी शुरू हुई और वहीं से हीरोइन और हीरो के मेकअप का चलन चला जिसे लड़कियों ने मर्दों से ज्यादा अपनाया मॉडर्न इंडिया में आज 20% से भी ज्यादा मर्द अपने आपके लिए मेकअप खरीदने पर अफसोस बच्चे 80% मत उनका मजाक उड़ाते नंबर 5 पर दोस्तों सबसे पहले यह पर्स लड़कियों के लिए नहींबल्कि लड़कों के लिए डिजाइन हुआ था लेकिन सोचने वाली बात तो यह है कि पर्स का इज्ज़त 7000 साल पहले हो चुका था फिर भी हमें इसे उसे करने में इतने साल कैसे लगे 16वीं सदी तक शायद दरजी इतने हाईटेक नहीं थे कि वहशिल्पा इसी वजह से लड़के पूछ इसका इस्तेमाल करते थे यह इतना प्रैक्टिकल था कि धीरे-धीरे लड़कियां भी इसे उसे करने लगी लेकिन कुछ सालों बाद जब दर्जी ने फाइनली जब सिलना सीख लिया तब मर्दों ने पर्स को उसे करना बंद किया लेकिन तब तक औरतों के लिए पर्स एक है फैशन एसेसरीज बन चुका था नंबर 6 हिल्स जहां आज के लोग ठीक से चल भी नहीं सकते वहां पहले के मर्द हील्स पहनकर घोड़े सवारी करते थे और इसी दौरान हिल्स की शुरुआत हुई हिल्स पहन के चलने में कितना दर्द होता है यह तो सबको पता है इसीलिए पहले इसे सिर्फ अमीर लोग उसे करते थे क्योंकि वह काम चलना प्रेफर करते थे फिर मर्दों वाले हिल्स के फ्रेंड लड़कियों ने भी नोटिस की और जब उन्होंने हिल्स पहने तब सब की गर्दन उनकी तरफ मुड़ गई क्योंकि लड़कियां हिल्स में बहुत ज्यादा खूबसूरत लग रही थी लेकिन लेकिन यह हिल्स इतने नुकीले थे कि 1740 से 1790 के बीच दोनों ने इसे पहनना बंद कर दिया और मर्दों के साथ-साथ लड़कियोंके पैरों को हिल्स की नोक से राहत मिली थी कि 1900 के मध्य में फैशन फोटोग्राफी या कमरे की इन्वेंशन से फैशन फोटोग्राफी की शुरुआत हुई और फटॉग्रफर्स ने लड़कियों के पैरों में दर्द ना के हिल्स पहना दी राज वही दर्द मर्दों को देने का काम करें नंबर 7 इयररिंग्स हमारे कान इतने इंपोर्टेंट है कि इंसान ने इसके लिए भी ज्वेलरी बना ली लेकिन क्या आप जानते हो कि यह खुराक आई आइडिया पहले लड़कों ने अपने लिए निकला था एक्चुअली यह रिंग्स को इजिप्ट के लोग 7000 साल पहले से पहना आए वह भी इसीलिए क्योंकि वह अपनी दौलत का शो करना चाहती थी और कहीं हजार सालों तक वह इसे इसी वजह से उसे करते रहे लेकिन तेरे भी सेंचुरी में चर्च ने इस पर बैन लगा दिया ऐसे में सिर्फ कर समुद्री लुटेरे और गरीब किसान इयररिंग्स पहनने लगे और हर एक इयररिंग्स का एक मतलब बन गया जैसे कर इस समाज से नफरत दर्शाने के लिए इयररिंग्स पहनते थे किस सिर्फ अपने बड़े बेटे की पियर्सिंग करवाते थे और जब कोई इंसान दोनों कानों में इयररिंगएस पहना था उसका मतलब होता था कि वह इंसान अपने खानदान का इकलौता इंसान है अगर वह मर गया तो उसका पूरा खानदान खत्म हो जाएगा आज भले लड़कों ने इयररिंग्स पहनना कम कर दिया और लड़कियों ने रिंग्स अपने नाम कर लिया कई जगह रिंग्स का कुछ मतलब होता है जैसे महाराष्ट्र में जब भी कोई इंसान नहीं शिक्षा लेने जाता है तो उसे स्थान में बिग बाली पहनी जाती है सिर्फ टॉल डार्क हैंडसम पर नहीं लड़की आप ब्रेड शोल्डर पर भी मरती है और अगर आपको रात को रात ऐसे सोल्डर बनाने की उसे करनी होगी 15वीं शताब्दी में मर्द हैंडसम देखने के लिए कॉरसेट का उसे करते थे जिसे पहनने के बाद उनके कंधे ब्रेड लंबे लगेअपने ब्रेड कंधों के इस सीक्रेट को ज्यादा दिन छुपा नहीं पाए जल्द ही लड़कियों को कॉरसेट का पता चल गया और 16वीं शताब्दी में यह लड़कियों का फैशन भी बन गया जो इतना पॉप्युलर था की क्वीन एलिजाबेथ फर्स्ट नवी और जब 18 से 21 में कर सेट पहनने से उनकी बॉडी नींबू की तरह क्विज हो गई तब लड़का हो या लड़की दोनों पार्टी ने कॉरसेट से दूरी बना ली यही नहीं लड़कियों को भी एहसास सुबह की कोर्ट से पहनकर वह मार दो जैसे दिख रही थी आज भले ही कॉरसेट हिस्ट्री में खो गए लेकिन उसका लड़का

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