अनमोल वचन ( यह सत्य है )

दुनिया का सबसे बड़ा जेवर आपकी मेहनत है |
जो हाथ सेवा के लिए उठते है | वे प्राथ्रना करने वाले हाथो से अधिक पवित्र है |
स्वार्थ में अच्छाईया ऐसे खो जाती है | जैसे समूह में नदिया |

( इस तरह )

:- इस तरह न कमाओ की पाप हो जाए |

:- इस तरह न खर्च करो की कर्जा हो जाए |

:- इस तरह न खाओ की मर्ज हो जाए |

:- इस तरह न बोलो की क्लेश हो जाए |

:- इस तरह न चलो की देर हो जाए |

:- इस तरह न सोचो की चिंता हो जाए |

( धन से )

:- धन से पुस्तक मिलता है | किन्तु ज्ञान नहीं |

:- धन से आभूषण मिलता है | किन्तु रुप नहीं |

:- धन से सुख मिलता है | किन्तु आनन्द नहीं |

:- धन से साथी मिलाती है | किन्तु सच्चे मित्र नहीं |

:- धन से भोजन मिलता है | किन्तु भूख नहीं |

:- धन से दवा मिलता है | किन्तु स्वास्थ्य नहीं |

:- धन से एकान्त मिलता है | किन्तु शान्ति नहीं |

:- धन से बिस्तर मिलता है | किन्तु नींद नहीं |

( एक चीज )

:- जितने के लिए कोई चीज है तो —- प्रेम

:- पिने के लिए कोई चीज है तो —- क्रोध

:- खाने के लिए कोई चीज है तो —- गम

:- देने के लिए कोई चीज है तो —- दान

:- दिखने के लिए कोई चीज है तो —- दया

:- लेने के लिए कोई चीज है तो —- ज्ञान

:- कहने के लिए कोई चीज है तो —- सत्य

:- रखने के लिए कोई चीज है तो —- इज्जत

:- फैकने के लिए कोई चीज है तो —- ईश्रया

:- छोड़ने के लिए कोई चीज है तो —- मोह

दुनिया का सबसे बड़ा जेवर आपकी मेहनत है |
जो हाथ सेवा के लिए उठते है | वे प्राथ्रना करने वाले हाथो से अधिक पवित्र है |
स्वार्थ में अच्छाईया ऐसे खो जाती है | जैसे समूह में नदिया |

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